21 May 2021 01:57 PM

जोग संजोग टाइम्स
बीकानेर। फिलहाल प्रदेश में सख्त लॉकडाउन चल रहा है। जिसके चलते दुकानें बंद हैं। प्रशासन की ओर से निर्धारित समय के बाद खुली दुकानों पर कार्रवाई हो रही है। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर शराब की दुकानें बन्द होने के बाद शहर में अवैध शराब का व्यापार शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता है। यह अवैध व्यापार शहर में खुले आम होता है।
इसे देखकर भी प्रशासन मूकदर्शी बना हुआ। जिला मुख्यालय के शहर स्थित चौतिना कुआ, रेलवे स्टेशन के सामने, जस्सूसर गेट के बाहर, मुक्ता प्रसाद, हरलाई हनुमान मंदिर,शिववैली, गंगाशहर रोड़ ऐसे इलाके है जहां प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम अवैध शराब बेची जा रही है लेकिन प्रशासन की मिली भगत या उदासीनता के कारण ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर सिनेमा गली चौराहे पर एक दुकान से लोगों को शराब दुगने-तिगुने दाम में बेची जा रही है।
जब प्रशासन को इसके बारे में अवगत कराया गया तो आबकारी विभाग की ओर से स्टॉफ की कमी का हवाला देते हुए गेंद पुलिस के पाले में डाल दी। पुलिस से इस बारे में बात की तो उन्होंने भी यही राग अलाप दिया। पुलिस ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाने के लिए स्टॉफ की पोस्टिंग फिलहाल सभी जगह कर रखी है।
इसलिए स्टाफ की कमी के चलते इस तरह के अवैध कारोबार पर नियंत्रण नहीं रख पाने की मजबूरी प्रकट की। जबकि सच यह है की इस तरह बिना प्रशासन की मिली भगत के शहर के बीचोंबीच मुख्य सडक़ पर इस तरह अवैध शराब का अड्डा बन जाना संभव ही नहीं है।
मालूम चला की यहां देशी शराब के क्वाटर 100 रुपये, अंग्रेजी शराब क्वाटर 250 रुपए, बीयर की कीमत 250 रुपए वसूले जा रहे हैं जो की निर्धारित कीमत से करीब दुगनी है। शहर के बीचोंबीच इस तरह शराबियों का जमावड़ा शहर वासियों के लिए भी सरदर्द का कारण बना हुआ है। इसी के साथ यहां आने वाले लोगों द्वारा मास्क नहीं लगाए जाता है। इसी के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है। जिससे शहर में कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
जोग संजोग टाइम्स
बीकानेर। फिलहाल प्रदेश में सख्त लॉकडाउन चल रहा है। जिसके चलते दुकानें बंद हैं। प्रशासन की ओर से निर्धारित समय के बाद खुली दुकानों पर कार्रवाई हो रही है। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर शराब की दुकानें बन्द होने के बाद शहर में अवैध शराब का व्यापार शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता है। यह अवैध व्यापार शहर में खुले आम होता है।
इसे देखकर भी प्रशासन मूकदर्शी बना हुआ। जिला मुख्यालय के शहर स्थित चौतिना कुआ, रेलवे स्टेशन के सामने, जस्सूसर गेट के बाहर, मुक्ता प्रसाद, हरलाई हनुमान मंदिर,शिववैली, गंगाशहर रोड़ ऐसे इलाके है जहां प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम अवैध शराब बेची जा रही है लेकिन प्रशासन की मिली भगत या उदासीनता के कारण ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर सिनेमा गली चौराहे पर एक दुकान से लोगों को शराब दुगने-तिगुने दाम में बेची जा रही है।
जब प्रशासन को इसके बारे में अवगत कराया गया तो आबकारी विभाग की ओर से स्टॉफ की कमी का हवाला देते हुए गेंद पुलिस के पाले में डाल दी। पुलिस से इस बारे में बात की तो उन्होंने भी यही राग अलाप दिया। पुलिस ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाने के लिए स्टॉफ की पोस्टिंग फिलहाल सभी जगह कर रखी है।
इसलिए स्टाफ की कमी के चलते इस तरह के अवैध कारोबार पर नियंत्रण नहीं रख पाने की मजबूरी प्रकट की। जबकि सच यह है की इस तरह बिना प्रशासन की मिली भगत के शहर के बीचोंबीच मुख्य सडक़ पर इस तरह अवैध शराब का अड्डा बन जाना संभव ही नहीं है।
मालूम चला की यहां देशी शराब के क्वाटर 100 रुपये, अंग्रेजी शराब क्वाटर 250 रुपए, बीयर की कीमत 250 रुपए वसूले जा रहे हैं जो की निर्धारित कीमत से करीब दुगनी है। शहर के बीचोंबीच इस तरह शराबियों का जमावड़ा शहर वासियों के लिए भी सरदर्द का कारण बना हुआ है। इसी के साथ यहां आने वाले लोगों द्वारा मास्क नहीं लगाए जाता है। इसी के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है। जिससे शहर में कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
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