05 May 2026 08:16 AM

बीकानेर- बीकानेर के कोलायत से एक मामला आज कल चर्चा में चल रहा है जो की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने के बावजूद और अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद भी प्रशासन बिल्कुल शांत है और वहाँ के लोगों में एक बड़ा रोष है की आदेश के बावजूद कारवाही नहीं हो रही है ये है मामला तहसील हदा के ग्राम पंचायत सियाणा बड़ा में खसरा नंबर 293 स्थित सार्वजनिक कुआं पायतन भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। जब एक के बाद एक उच्च स्तर से आदेश जारी हो चुके हैं, तब भी मौके पर कार्रवाई न होना गंभीर लापरवाही या योजनाबद्ध देरी की ओर इशारा कर रहा है।
मामले में वर्ष 1985 का एक कथित फर्जी पट्टा सामने आया है, जिसे तत्कालीन सरपंच हड़माना राम मेघवाल द्वारा अपने पुत्र सोहनलाल के नाम जारी बताया जा रहा है। इसी पट्टे के आधार पर अतिक्रमणकारियों ने उच्च न्यायालय जोधपुर में स्टे ऑर्डर की मांग की, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट रूप से स्टे देने से इनकार कर दिया।
इसके बावजूद प्रशासनिक मशीनरी की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है—
क्या प्रशासन किसी दबाव में है?
या फिर अतिक्रमण को बचाने के लिए जानबूझकर देरी की जा रही है?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय राजस्थान जयपुर की जनसुनवाई, कलेक्टर बीकानेर की अध्यक्षता में हुई सतर्कता समिति की बैठक तथा न्यायालय के निर्देशों के बाद भी तहसीलदार हदा और SDM कोलायत स्तर पर कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। मौके पर JCB मशीनें खड़ी होने की सूचनाएं भी सामने आईं, लेकिन अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना मानी जा रही है। आमजन में यह संदेश जा रहा है कि यदि न्यायालय और सरकार के आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो कानून का डर समाप्त हो रहा है।
जनता के सवाल:
जब हाईकोर्ट ने स्टे नहीं दिया, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या प्रशासनिक अधिकारी आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं?
क्या यह पूरा मामला किसी मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
सियाणा बड़ा का यह मामला अब केवल एक अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के सम्मान का बन गया है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
बीकानेर- बीकानेर के कोलायत से एक मामला आज कल चर्चा में चल रहा है जो की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने के बावजूद और अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद भी प्रशासन बिल्कुल शांत है और वहाँ के लोगों में एक बड़ा रोष है की आदेश के बावजूद कारवाही नहीं हो रही है ये है मामला तहसील हदा के ग्राम पंचायत सियाणा बड़ा में खसरा नंबर 293 स्थित सार्वजनिक कुआं पायतन भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। जब एक के बाद एक उच्च स्तर से आदेश जारी हो चुके हैं, तब भी मौके पर कार्रवाई न होना गंभीर लापरवाही या योजनाबद्ध देरी की ओर इशारा कर रहा है।
मामले में वर्ष 1985 का एक कथित फर्जी पट्टा सामने आया है, जिसे तत्कालीन सरपंच हड़माना राम मेघवाल द्वारा अपने पुत्र सोहनलाल के नाम जारी बताया जा रहा है। इसी पट्टे के आधार पर अतिक्रमणकारियों ने उच्च न्यायालय जोधपुर में स्टे ऑर्डर की मांग की, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट रूप से स्टे देने से इनकार कर दिया।
इसके बावजूद प्रशासनिक मशीनरी की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है—
क्या प्रशासन किसी दबाव में है?
या फिर अतिक्रमण को बचाने के लिए जानबूझकर देरी की जा रही है?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय राजस्थान जयपुर की जनसुनवाई, कलेक्टर बीकानेर की अध्यक्षता में हुई सतर्कता समिति की बैठक तथा न्यायालय के निर्देशों के बाद भी तहसीलदार हदा और SDM कोलायत स्तर पर कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। मौके पर JCB मशीनें खड़ी होने की सूचनाएं भी सामने आईं, लेकिन अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना मानी जा रही है। आमजन में यह संदेश जा रहा है कि यदि न्यायालय और सरकार के आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो कानून का डर समाप्त हो रहा है।
जनता के सवाल:
जब हाईकोर्ट ने स्टे नहीं दिया, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या प्रशासनिक अधिकारी आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं?
क्या यह पूरा मामला किसी मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
सियाणा बड़ा का यह मामला अब केवल एक अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के सम्मान का बन गया है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
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