08 June 2026 07:39 AM

*“नशा मुक्त युवा, मजबूत परिवार, जीवंत संस्कृति और स्वच्छ पर्यावरण: विकसित भारत की चार मजबूत नींव” — निशा लिम्बा*
आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है, लेकिन वर्तमान समय में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति समाज और देश के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। नशा युवाओं को न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करता है, बल्कि उन्हें परिवार, संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी दूर कर देता है। यही कारण है कि आज नशा मुक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन गई है।
तेजी से बदलती जीवनशैली और तकनीक के इस दौर में लोग अपने परिवारों से भी दूर होते जा रहे हैं। जहां पहले परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर बातचीत करते थे, वहीं आज अधिकांश समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। परिवार के साथ बिताया गया समय ही बच्चों और युवाओं में संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का निर्माण करता है। यदि परिवार मजबूत होगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए।
इसके साथ ही हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं। बीकानेर की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, धार्मिक विरासत और विशिष्ट खान-पान के लिए पूरे देश और विदेश में है। जब भी बीकानेर का नाम लिया जाता है तो भुजिया, पापड़, रसगुल्ले और छोटी काशी की गौरवशाली छवि लोगों के मन में उभरती है। यह पहचान वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक मूल्यों का परिणाम है। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को नहीं बचा पाएंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी।
आज पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण विषय है। लगातार बढ़ती गर्मी, जल संकट और प्रदूषण हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अब केवल बातें करने का समय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का समय है। एक पौधा लगाना अच्छी शुरुआत है, लेकिन उसकी देखभाल करके उसे वृक्ष बनाना हमारा वास्तविक कर्तव्य है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। स्वच्छता, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
आज आवश्यकता है कि युवा नशे से दूर रहें, खेलों और शारीरिक गतिविधियों को अपनाएं, परिवार के साथ समय बिताएं, अपनी संस्कृति और संस्कारों को संजोए रखें तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव बनते हैं।
यदि हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि नशा मुक्त समाज बनाएंगे, परिवार को प्राथमिकता देंगे, अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेंगे और प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो निश्चित रूप से आने वाला भारत अधिक स्वस्थ, संस्कारित, जागरूक और विकसित होगा।
“नशा छोड़ें, परिवार से जुड़ें, संस्कृति को अपनाएं और पर्यावरण को बचाएं — यही विकसित भारत का सच्चा मार्ग है।”
निशा लिंबा
राष्ट्रीय खिलाड़ी एव कोच
सचिव, जिला नेटबॉल संघ, बीकानेर
निदेशक ,दिशोदय स्पोर्ट्स फाउंडेशन।
“नशा मुक्त युवा, मजबूत परिवार, जीवंत संस्कृति और स्वच्छ पर्यावरण: विकसित भारत की चार मजबूत नींव” — निशा लिम्बा
आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है, लेकिन वर्तमान समय में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति समाज और देश के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। नशा युवाओं को न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करता है, बल्कि उन्हें परिवार, संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी दूर कर देता है। यही कारण है कि आज नशा मुक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन गई है।
तेजी से बदलती जीवनशैली और तकनीक के इस दौर में लोग अपने परिवारों से भी दूर होते जा रहे हैं। जहां पहले परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर बातचीत करते थे, वहीं आज अधिकांश समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। परिवार के साथ बिताया गया समय ही बच्चों और युवाओं में संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का निर्माण करता है। यदि परिवार मजबूत होगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए।
इसके साथ ही हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं। बीकानेर की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, धार्मिक विरासत और विशिष्ट खान-पान के लिए पूरे देश और विदेश में है। जब भी बीकानेर का नाम लिया जाता है तो भुजिया, पापड़, रसगुल्ले और छोटी काशी की गौरवशाली छवि लोगों के मन में उभरती है। यह पहचान वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक मूल्यों का परिणाम है। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को नहीं बचा पाएंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी।
आज पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण विषय है। लगातार बढ़ती गर्मी, जल संकट और प्रदूषण हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अब केवल बातें करने का समय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का समय है। एक पौधा लगाना अच्छी शुरुआत है, लेकिन उसकी देखभाल करके उसे वृक्ष बनाना हमारा वास्तविक कर्तव्य है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। स्वच्छता, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
आज आवश्यकता है कि युवा नशे से दूर रहें, खेलों और शारीरिक गतिविधियों को अपनाएं, परिवार के साथ समय बिताएं, अपनी संस्कृति और संस्कारों को संजोए रखें तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव बनते हैं।
यदि हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि नशा मुक्त समाज बनाएंगे, परिवार को प्राथमिकता देंगे, अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेंगे और प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो निश्चित रूप से आने वाला भारत अधिक स्वस्थ, संस्कारित, जागरूक और विकसित होगा।
“नशा छोड़ें, परिवार से जुड़ें, संस्कृति को अपनाएं और पर्यावरण को बचाएं — यही विकसित भारत का सच्चा मार्ग है।”
निशा लिंबा
राष्ट्रीय खिलाड़ी एव कोच
सचिव, जिला नेटबॉल संघ, बीकानेर
निदेशक ,दिशोदय स्पोर्ट्स फाउंडेशन।
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