19 October 2022 11:59 AM

जोग संजोग टाइम्स बीकानेर,
सरकारी व खाली पड़ी ज़मीनों पर कब्जे तो बीकानेर में आम बात है, लेकिन एक स्कूल ने सार्वजनिक चौक पर ही कब्जा कर रखा है। मामला गंगाशहर नोखा रोड़ स्थित बालवाड़ी स्कूल से जुड़ा है। बालवाड़ी का मुख्य हिस्सा नोखा रोड़ के पीछे खुलता है। यहां गंगाशहर का पहला चौक है। स्कूल के दुस्साहस की हद यह है कि वर्षों से इसने चौक के एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है। कुछ साल पहले प्रशासन ने कब्जा हटाया था, कुछ समय तक कब्जा खाली भी रहा, लेकिन फिर से मौका मिलते ही स्कूल ने कब्जा कर लिया। इस बार स्कूल ने चालाकी दिखाते हुए पक्की दीवार नहीं बनाई, बल्कि ईंटे रख दी, पेड़ लगा लिए। अब इस सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग यह स्कूल ही करता है। जोग संजोग टाइम्स ने स्कूल की मालिक शांता भट्ट के पुत्र राजू से बात की तो उन्होंने खुद को सामान्य शिक्षक बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। कहा कि बड़ी मैडम से बात कीजिए। अधिक सवाल करने पर कहा कि केवल बसें खड़ी रहती है, किसी प्रकार का कब्जा नहीं है। जबकि साफ तौर पर कब्जा किया हुआ दिख रहा है।बता दें कि आसपास के निवासियों को भी इस बात की तकलीफ़ है। मगर शिक्षकों का लिहाज करते हुए कुछ कहते नहीं है।
जोग संजोग टाइम्स बीकानेर,
सरकारी व खाली पड़ी ज़मीनों पर कब्जे तो बीकानेर में आम बात है, लेकिन एक स्कूल ने सार्वजनिक चौक पर ही कब्जा कर रखा है। मामला गंगाशहर नोखा रोड़ स्थित बालवाड़ी स्कूल से जुड़ा है। बालवाड़ी का मुख्य हिस्सा नोखा रोड़ के पीछे खुलता है। यहां गंगाशहर का पहला चौक है। स्कूल के दुस्साहस की हद यह है कि वर्षों से इसने चौक के एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है। कुछ साल पहले प्रशासन ने कब्जा हटाया था, कुछ समय तक कब्जा खाली भी रहा, लेकिन फिर से मौका मिलते ही स्कूल ने कब्जा कर लिया। इस बार स्कूल ने चालाकी दिखाते हुए पक्की दीवार नहीं बनाई, बल्कि ईंटे रख दी, पेड़ लगा लिए। अब इस सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग यह स्कूल ही करता है। जोग संजोग टाइम्स ने स्कूल की मालिक शांता भट्ट के पुत्र राजू से बात की तो उन्होंने खुद को सामान्य शिक्षक बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। कहा कि बड़ी मैडम से बात कीजिए। अधिक सवाल करने पर कहा कि केवल बसें खड़ी रहती है, किसी प्रकार का कब्जा नहीं है। जबकि साफ तौर पर कब्जा किया हुआ दिख रहा है।बता दें कि आसपास के निवासियों को भी इस बात की तकलीफ़ है। मगर शिक्षकों का लिहाज करते हुए कुछ कहते नहीं है।
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