04 December 2022 12:01 PM

जोग संजोग टाइम्स,
बीकानेर के खाजूवाला में पशु क्रूरता का एक और मामला सामने आया है। यहां 22 केवाईडी में एक गाय की पूंछ काट दी गई है। जिसके बाद से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। खाजूवाला पुलिस मामला दर्ज होने के बाद अज्ञात की तलाश में जुटी हुई है। घटना खाजूवाला के गांव 22 केवाईडी की है। इसी गांव के निवासी मोहनलाल नायक ने पुलिस को एफआईआर दी है कि अज्ञात लोगों ने गाय की पूंछ काट दी। गाय के गुप्तांगों पर भी भारी चोट के निशान पाए गए हैं। घटना एक दिसम्बर की मध्य रात्रि के बाद की है। दो दिसम्बर को सुबह ये गाय तड़फती हुई मिली थी। आशंका जताई जा रही है कि पहले गाय के गुप्तांगों पर हमले किए गए और बाद में उसकी पूंछ काट दी गई। घायल अवस्था में गाय गांव में एक कोने में पड़ी मिली है। गाय को इस हालत में देखने के बाद क्षेत्र के लोगों ने पूंछ ढूंढने का प्रयास किया लेकिन नहीं मिली। आसपास कोई सुराग भी नहीं मिला कि ये क्रूरता किसने की है। मोहनलाल की सूचना पर पुलिस ने एफआईआर में राजस्थान गोवंशीय पशु (वध प्रतिषेध) अधिनियम 1995 की धाराओं को जोड़ते हुए मामला दर्ज किया है। बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले भी पशुओं के साथ क्रूरता के मामले सामने आते रहे हैं।
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बीकानेर के खाजूवाला में पशु क्रूरता का एक और मामला सामने आया है। यहां 22 केवाईडी में एक गाय की पूंछ काट दी गई है। जिसके बाद से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। खाजूवाला पुलिस मामला दर्ज होने के बाद अज्ञात की तलाश में जुटी हुई है। घटना खाजूवाला के गांव 22 केवाईडी की है। इसी गांव के निवासी मोहनलाल नायक ने पुलिस को एफआईआर दी है कि अज्ञात लोगों ने गाय की पूंछ काट दी। गाय के गुप्तांगों पर भी भारी चोट के निशान पाए गए हैं। घटना एक दिसम्बर की मध्य रात्रि के बाद की है। दो दिसम्बर को सुबह ये गाय तड़फती हुई मिली थी। आशंका जताई जा रही है कि पहले गाय के गुप्तांगों पर हमले किए गए और बाद में उसकी पूंछ काट दी गई। घायल अवस्था में गाय गांव में एक कोने में पड़ी मिली है। गाय को इस हालत में देखने के बाद क्षेत्र के लोगों ने पूंछ ढूंढने का प्रयास किया लेकिन नहीं मिली। आसपास कोई सुराग भी नहीं मिला कि ये क्रूरता किसने की है। मोहनलाल की सूचना पर पुलिस ने एफआईआर में राजस्थान गोवंशीय पशु (वध प्रतिषेध) अधिनियम 1995 की धाराओं को जोड़ते हुए मामला दर्ज किया है। बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले भी पशुओं के साथ क्रूरता के मामले सामने आते रहे हैं।
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