07 April 2022 12:24 PM

जोग संजोग टाइम्स बीकानेर
मिली जानकारी के अनुसार बीकानेर में समस्त झुग्गी वालों की अध्यक्षता करते हुए अधिवक्ता संदीप पाठक ने आज एक बैठक की जिस बैठक में समस्त झुग्गी वालों ने “फूल आंदोलन” की शुरुआत की है सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए आवंटन के स्थाई दस्तावेज की मांग की गई है साथ ही साथ जो सरकारी कमेटी भी गठित की गई उस कमेटी में झुग्गी वालों को भी शामिल करने के बारे में चर्चा की गई है, झुग्गी झोपड़ियों में पढ़ रहे 150 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य पर मंडराते गहरे संकट के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई साथ ही साथ इस स्थान से दूसरे स्थान पर पुनर्वासित करने पर झुग्गियों से काम करने जा रहे मजदूरों, विद्यार्थियों, रुग्ण एवम् गर्भवतियों को परिवहन के संदर्भ में आने वाली असुविधा भी एक बड़ा विषय है, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली माताओं बहनों के लिए मूलभूत सुविधा पानी और शौचालय की व्यवस्था पर विचार विमर्श किया गया आगामी 11 अप्रैल को इस बैठक को व्यापक करते हुए “फूल आंदोलन” को तेज करने की बात करी गई प्रशासन और सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है की वे इन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएं, जिस पर विगत 30 वर्षों से सरकारों ने आंखें मूंद रखी हैं ।
जोग संजोग टाइम्स बीकानेर
मिली जानकारी के अनुसार बीकानेर में समस्त झुग्गी वालों की अध्यक्षता करते हुए अधिवक्ता संदीप पाठक ने आज एक बैठक की जिस बैठक में समस्त झुग्गी वालों ने “फूल आंदोलन” की शुरुआत की है सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए आवंटन के स्थाई दस्तावेज की मांग की गई है साथ ही साथ जो सरकारी कमेटी भी गठित की गई उस कमेटी में झुग्गी वालों को भी शामिल करने के बारे में चर्चा की गई है, झुग्गी झोपड़ियों में पढ़ रहे 150 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य पर मंडराते गहरे संकट के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई साथ ही साथ इस स्थान से दूसरे स्थान पर पुनर्वासित करने पर झुग्गियों से काम करने जा रहे मजदूरों, विद्यार्थियों, रुग्ण एवम् गर्भवतियों को परिवहन के संदर्भ में आने वाली असुविधा भी एक बड़ा विषय है, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली माताओं बहनों के लिए मूलभूत सुविधा पानी और शौचालय की व्यवस्था पर विचार विमर्श किया गया आगामी 11 अप्रैल को इस बैठक को व्यापक करते हुए “फूल आंदोलन” को तेज करने की बात करी गई प्रशासन और सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है की वे इन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएं, जिस पर विगत 30 वर्षों से सरकारों ने आंखें मूंद रखी हैं ।
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